वास्तुशास्त्र
वास्तुशास्त्र हे जागा आणि दिशांचे पारंपरिक भारतीय शास्त्र आहे. आरोग्य, सुसंवाद आणि समृद्धीसाठी घरे आणि कामाची ठिकाणे पंचमहाभूते आणि आठ दिशांशी जुळवते.
वैयक्तिक वास्तू सल्ला घ्याआठ दिशा
वायव्य (उत्तर-पश्चिम)
NW- स्वामी देवता
- वायु
- स्वामी ग्रह
- चंद्र
- तत्त्व
- वायु
यासाठी उत्तम: अतिथि कक्ष, गैराज, तैयार माल का भंडार
उत्तर
N- स्वामी देवता
- कुबेर
- स्वामी ग्रह
- बुध
- तत्त्व
- जल
यासाठी उत्तम: तिजोरी, बैठक, अध्ययन — धन और अवसर
ईशान (उत्तर-पूर्व)
NE- स्वामी देवता
- ईशान (शिव)
- स्वामी ग्रह
- गुरु
- तत्त्व
- जल
यासाठी उत्तम: पूजा घर, ध्यान, जल स्रोत — हल्का और खुला रखें
पश्चिम
W- स्वामी देवता
- वरुण
- स्वामी ग्रह
- शनि
- तत्त्व
- आकाश
यासाठी उत्तम: बच्चों का कमरा, भोजन कक्ष, ऊपरी पानी की टंकी
ब्रह्मस्थान (केंद्र)
C- स्वामी देवता
- ब्रह्मा
- स्वामी ग्रह
- —
- तत्त्व
- आकाश
यासाठी उत्तम: खुला और साफ़ रखें — घर का ऊर्जा केंद्र
पूर्व
E- स्वामी देवता
- इंद्र
- स्वामी ग्रह
- सूर्य
- तत्त्व
- वायु
यासाठी उत्तम: मुख्य द्वार, खिड़कियाँ, सुबह की रोशनी — स्वास्थ्य और प्रगति
नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम)
SW- स्वामी देवता
- निऋति
- स्वामी ग्रह
- राहु
- तत्त्व
- पृथ्वी
यासाठी उत्तम: मुख्य शयनकक्ष, भारी फ़र्नीचर — परिवार के मुखिया की मज़बूती
दक्षिण
S- स्वामी देवता
- यम
- स्वामी ग्रह
- मंगल
- तत्त्व
- पृथ्वी
यासाठी उत्तम: शयनकक्ष, भारी सामान — स्थिरता और विश्राम
आग्नेय (दक्षिण-पूर्व)
SE- स्वामी देवता
- अग्नि
- स्वामी ग्रह
- शुक्र
- तत्त्व
- अग्नि
यासाठी उत्तम: रसोई, बिजली के उपकरण
सोप्या वास्तू टिप्स
- 1ईशान कोण को साफ़, हल्का और भारी वस्तुओं या शौचालय से मुक्त रखें.
- 2आग्नेय कोण की रसोई में पूर्व की ओर मुख करके खाना बनाएँ।
- 3सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व की ओर रखें, कभी उत्तर की ओर नहीं।
- 4जहाँ संभव हो मुख्य द्वार उत्तर, पूर्व या ईशान में रखें और उसे रोशन रखें।
- 5टपकते नल और टूटी चीज़ें जल्दी ठीक करें — माना जाता है कि ये समृद्धि घटाती हैं।
- 6घर का मध्य भाग खुला और बिना सामान के रखें।