मंत्र

मंत्र हे ध्यान, प्रार्थना आणि ग्रहांच्या उपायांसाठी वापरले जाणारे पवित्र ध्वनी आहेत. खाली नवग्रह बीज मंत्र आणि मोठ्या प्रमाणावर जपले जाणारे वैदिक मंत्र आहेत.

सार्वत्रिक मंत्र

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

Om Bhur Bhuvah Svah, Tat Savitur Varenyam, Bhargo Devasya Dhimahi, Dhiyo Yo Nah Prachodayat

अर्थ: हम सविता देव के दिव्य तेज का ध्यान करते हैं; वह हमारी बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करे।

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam, Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat

अर्थ: हम त्रिनेत्र भगवान शिव की उपासना करते हैं जो सबका पोषण करते हैं; वे हमें मृत्यु और बंधन से मुक्त कर अमरत्व की ओर ले जाएँ।

शिव पंचाक्षरी

ॐ नमः शिवाय

Om Namah Shivaya

अर्थ: कल्याणकारी शिव को नमन।

गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

Om Gam Ganapataye Namah

अर्थ: विघ्नहर्ता भगवान गणेश को नमन — किसी भी कार्य के आरंभ में जपा जाता है।

नवग्रह बीज मंत्र

सू

सूर्य

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

Om Hraam Hreem Hraum Sah Suryaya Namah

पारंपरिक जपसंख्या
७,०००
उत्तम वार
रविवार
चं

चंद्र

ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः

Om Shraam Shreem Shraum Sah Chandramase Namah

पारंपरिक जपसंख्या
११,०००
उत्तम वार
सोमवार
मं

मंगल

ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

Om Kraam Kreem Kraum Sah Bhaumaya Namah

पारंपरिक जपसंख्या
१०,०००
उत्तम वार
मंगलवार
बु

बुध

ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

Om Braam Breem Braum Sah Budhaya Namah

पारंपरिक जपसंख्या
९,०००
उत्तम वार
बुधवार
गु

गुरु

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

Om Graam Greem Graum Sah Gurave Namah

पारंपरिक जपसंख्या
१९,०००
उत्तम वार
गुरुवार
शु

शुक्र

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

Om Draam Dreem Draum Sah Shukraya Namah

पारंपरिक जपसंख्या
१६,०००
उत्तम वार
शुक्रवार
श

शनि

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

Om Praam Preem Praum Sah Shanaischaraya Namah

पारंपरिक जपसंख्या
२३,०००
उत्तम वार
शनिवार
रा

राहु

ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

Om Bhraam Bhreem Bhraum Sah Rahave Namah

पारंपरिक जपसंख्या
१८,०००
उत्तम वार
शनिवार
के

केतु

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

Om Sraam Sreem Sraum Sah Ketave Namah

पारंपरिक जपसंख्या
१७,०००
उत्तम वार
मंगलवार

शांत मनाने आणि योग्य उच्चाराने जप करा. तुमच्या कुंडलीनुसार उपायांसाठी ज्योतिषांचा सल्ला घ्या.

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